भारत की किशोर न्याय व्यवस्था: पुनर्वास, उत्तरदायित्व और सुधार की चुनौती
भारत की किशोर न्याय व्यवस्था इस समय एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। किशोर न्याय (बालकों की देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 [JJ Act, 2015] के एक दशक ने जहाँ उल्लेखनीय प्रगति को रेखांकित किया है, वहीं स्थायी चुनौतियों को भी उजागर किया है।
- इस अधिनियम ने “ट्रांसफर सिस्टम” की व्यवस्था दी, जिसके तहत 16 वर्ष या उससे अधिक आयु के किशोर यदि गंभीर अपराधों में संलिप्त पाए जाते हैं तो विशेष परिस्थितियों में उन पर वयस्कों के समान मुकदमा चलाया जा सकता है।
- यह बदलाव महज़ पुनर्वास-केन्द्रित दृष्टिकोण से हटकर गंभीर अपराधों के प्रति जवाबदेही की ओर एक महत्वपूर्ण परिवर्तन ....
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