रिश्वतखोरी, विधायी विशेषाधिकारों द्वारा संरक्षित नहीं
4 मार्च, 2024 को सुप्रीम कोर्ट की 7 न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ द्वारा दिये गए एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा गया कि कोई भी सांसद या विधायक सदन में वोट या भाषण के संबंध में रिश्वतखोरी के आरोप में अनुच्छेद 105 और 194 के तहत अभियोजन से छूट प्राप्त करने के लिए विशेषाधिकार का दावा नहीं कर सकता।
- इस फैसले के साथ, शीर्ष अदालत ने अपने 1998 के पी-वी- नरसिम्हा राव निर्णय को खारिज कर दिया है, जिसमें ऐसे सांसदों को छूट दी गई थी।
- सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, रिश्वत लेना एक अलग अपराध है जो संसद या विधान सभा के ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 रचनात्मक पूर्वन्याय: विवादों के अंतिम समाधान का सिद्धांत
- 2 जून 2026 के घटनाक्रम पर आधारित
- 3 क्रिटिकल मिनरल्स और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण
- 4 भारत में मानव-वन्यजीव संघर्ष
- 5 सेलुलर कृषि और संवर्धित मांस
- 6 भारत का बढ़ता रोग बोझ
- 7 जलवायु परिवर्तन और चुनाव
- 8 मरुस्थलीकरण और सूखे पर G7 घोषणा
- 9 अपशिष्ट जल प्रदूषण से समुद्री संरक्षित क्षेत्रों को खतरा
- 10 UAE का OPEC से बाहर निकलना
- 1 प्रवासी श्रमिकों हेतु राशन कार्ड: सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
- 2 पीआईबी के तहत तथ्य-जांच इकाई पर रोक
- 3 निर्वाचन आयोग द्वारा आदर्श आचार संहिता की घोषणा
- 4 44 प्रतिशत लोक सभा सांसदों पर आपराधिाक आरोप: ADR
- 5 ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ पर समिति की रिपोर्ट
- 6 अरुणाचल और नगालैंड में AFSPA का विस्तार
- 7 डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफ़ॉर्म एवं चक्षु सुविधा
- 8 राष्ट्रीय युवा संसद महोत्सव, 2024

