अरावली पर्वतमाला को खतरा
1975 के बाद अरावली पर्वतमाला के भूमि उपयोग की गतिशीलता पर किये गए एक हालिया वैज्ञानिक अध्ययन में यह पाया गया है कि अवैध खनन, वनों की कटाई और मानवीय अतिक्रमण के कारण इस क्षेत्र के पर्यावरण का क्षरण हुआ है और साथ ही इस क्षेत्र में भूजल भंडार में कमी आई है। यह अध्ययन हाल ही में ‘अर्थ साइंस इंफॉर्मेटिक्स’ नामक जर्नल में प्रकाशित किया गया।
- 1975 से 2019 के बीच, अरावली पहाड़ियों का लगभग 8% (5,772.7 वर्ग किमी.) हिस्सा गायब हो गया है, जिसमें 5% (3,676 वर्ग किमी.) बंजर भूमि में बदल गया है और 1% (776.8 वर्ग किमी.) ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 टर्टल ट्रेल्स
- 2 काजीरंगा: एक-सींग वाले गैंडों का अंतिम सुरक्षित दुर्ग
- 3 डिक्लिप्टेरा पाखालिका नामक पुष्पीय पौधे की नई प्रजाति की खोज
- 4 केरल में ड्रैगनफ्लाई की नई प्रजाति की पहचान
- 5 असम के गर्भांगा रिज़र्व फ़ॉरेस्ट में चींटी की नई प्रजाति की खोज
- 6 पेरू के क्लाउड फॉरेस्ट में मेंढक की नई प्रजाति की खोज
- 7 बायोफैच 2026 में मेघालय की भागीदारी
- 8 ट्रैपडोर मकड़ी की नई प्रजाति की खोज
- 9 आर्मी ऐंट्स की दो नई प्रजातियों की खोज
- 10 लक्षद्वीप में खोजी गई ‘स्क्वाट लॉब्स्टर’ की नई प्रजाति
पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी
- 1 ग्रेट बैरियर रीफ को खतरा
- 2 अंटार्कटिका के तापमान में औसत से 10°C अधिक वृद्धि
- 3 भारत में 3 नए रामसर स्थल
- 4 राज्यों से कीटनाशकों के उपयोग पर अंकुश लगाने का आग्रह
- 5 देश में लगभग 10,600 मेगावाट भूतापीय बिजली की क्षमता
- 6 भारत की अक्षय ऊर्जा क्षमता
- 7 वैश्विक बाढ़ की घटनाओं में वृद्धि
- 8 बैलास्ट वाटर का प्रबंधन
- 9 आर्कटिक की नदियों में पारा

