कावेरी जल विवाद: संकट के दौर में जल-बंटवारे की नई चुनौती
हाल ही में कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) ने कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) के उस निर्णय का समर्थन किया, जिसमें कर्नाटक को 29 जुलाई से 12 अगस्त, 2026 तक 15 दिनों के लिए प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी तमिलनाडु को छोड़ने का निर्देश दिया गया। यह मात्रा लगभग 4.5 टीएमसी फीट के बराबर है। दक्षिण-पश्चिम मानसून की कमजोर स्थिति और कावेरी बेसिन में जल संकट के कारण यह निर्णय अंतर्राज्यीय जल-बंटवारे की समस्या को पुनः चर्चा में ले आया है।
संस्थागत व्यवस्था
- कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) की स्थापना वर्ष 2018 में कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण (CWDT) के ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 जंगल की आग और मानव स्वास्थ्य: एक बढ़ता वैश्विक और राष्ट्रीय संकट
- 2 स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण के लिए भारत में 'ग्रिड क्रांति' की आवश्यकता
- 3 समावेशी 'ब्लू इकोनॉमी' और तटीय विरासत का पुनरुद्धार
- 4 शांति अधिनियम (SHANTI Act): भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजीकरण और परमाणु दायित्व व्यवस्था में बदलाव
- 5 भोटेकोशी बाढ़: एक भयावह हिमालयी त्रासदी
- 6 भारत में शहरी इमारतों की अग्नि सुभेद्यता: कारण, प्रभाव और समाधान
- 7 भारत में बढ़ता कैंसर का बोझ: चुनौतियाँ, कारण और रणनीतिक समाधान
- 8 आपदा प्रबंधन में ‘स्मार्ट एआई कैशिंग’ और 'कोऑपरेटिव कैशिंग' की भूमिका
- 9 भारत-कनाडा संबंध:अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध की चुनौती
- 10 राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव: पहली बार CEO की नियुक्ति क्यों?

