भारतीय अर्थव्यवस्था तथा ‘ट्विन बैलेंस शीट’ की समस्या
हाल ही में, केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा दिए गए एक बयान के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था ‘ट्विन बैलेंस शीट’ की समस्या से बाहर निकल गई है। उनके अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का मुनाफा वित्तीय वर्ष 2022-23 में बढ़कर 1.04 लाख करोड़ रुपए हो गया, जो 2014 की तुलना में तीन गुना है।
मुख्य बिंदु
- अर्थः ‘ट्विन-बैलेंस शीट’ की समस्या का अर्थ- एक ही समय में बैंकों और कॉरपोरेट की वित्तीय सेहत में गिरावट से है। इस स्थिति में कर्ज लेने तथा कर्ज प्रदान करने वाली संस्थाएं, दोनों ही तनाव में रहते हैं।
- ज्ञात है कि एक समय भारतीय अर्थव्यवस्था संकट के ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 छत्तीसगढ़ से कोस्टा रिका को फोर्टिफाइड चावल कर्नेल का प्रथम निर्यात
- 2 राष्ट्रीय रूपरेखा “डिजी बंदर” का शुभारंभ
- 3 इंडिया मैरीटाइम वीक 2025
- 4 राष्ट्रीय बीज निगम के अत्याधुनिक बीज प्रसंस्करण संयंत्र का उद्घाटन
- 5 सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के विनिर्माण को बढ़ावा देने की योजना
- 6 4 महत्त्वपूर्ण खनिजों की रॉयल्टी दरों का युक्तिकरण
- 7 राष्ट्रीय शहरी कॉन्क्लेव 2025
- 8 वाटरशेड महोत्सव: जल पुनरुद्धार हेतु राष्ट्रीय पहल
- 9 आधार विज़न 2032 : UIDAI की नई रूपरेखा
- 10 शहरी सहकारी ऋण क्षेत्र का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन

