अध्याय 7: सामाजिक क्षेत्र
- नये कल्याणकारी दृष्टिकोण खर्च होने वाले प्रत्येक रुपये का प्रभाव बढ़ाने पर केन्द्रित हैं। स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और सुशासन का डिजिटलीकरण कल्याणकारी कार्यक्रम पर खर्च होने वाले प्रत्येक रुपये का प्रभाव कई गुना बढ़ाने वाला है।
- वित्त वर्ष 2018 और वित्त वर्ष 2024 के बीच बाजार मूल्य आधारित जीडीपी करीब 9.5 प्रतिशत की संचित वार्षिक वृद्धिदर के साथ बढ़ी है, जबकि कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च 12.8 प्रतिशत संचित वार्षिक वृद्धिदर के साथ बढ़ा है।
- असमानता का संकेतक, गिनी कोइफिशियंट, देश के ग्रामीण क्षेत्र के मामले में 0.283 से घटकर 0.266 और शहरी क्षेत्र के मामले में 0.363 से 0.314 पर आ गए।
- 34.7 ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 भारत में एआई व्यवस्था/ पारिस्थितिकी तंत्र का विकास
- 2 पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन
- 3 संतुलित वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण
- 4 राजकोषीय उन्नति
- 5 औद्योगिक उत्पादन
- 6 व्यापार प्रदर्शन: निर्यात में विविधता और सेवाओं में मजबूती
- 7 रोजगार एवं श्रम बाजार
- 8 विकास के क्षेत्रीय कारक
- 9 अर्थव्यवस्था की स्थिति
- 10 एआई के युग में श्रम की स्थिति

