स्वदेशी आंदोलन: राष्ट्रीय गौरव और एकता की भावना
स्वदेशी आंदोलन, 1905 में बंगाल विभाजन के विरोध में शुरू हुआ यह आंदोलन, धीरे-धीरे पूरे भारत में फैल गया। इसने न केवल ब्रिटिश आर्थिक शोषण को उजागर किया बल्कि राष्ट्रीय गौरव और एकता की भावना को भी बढ़ावा दिया।
- स्वदेशी आंदोलन का उद्देश्य भारतीयों को विदेशी वस्त्रों और उत्पादों का बहिष्कार करने और स्वदेशी (देश में निर्मित) वस्त्रों और उत्पादों को अपनाने के लिए प्रेरित करना था।
राष्ट्रीय गौरव और एकता को बढ़ावा
- बंगाल विभाजन का विरोध: 1905 में, वायसराय लॉर्ड कर्जन ने बंगाल का विभाजन किया, जिससे भारतीयों में भारी असंतोष उत्पन्न हुआ। बंगाल विभाजन के विरोध में स्वदेशी आंदोलन ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 भारतीय चित्रकला का विकास
- 2 गुप्तकालीन मुद्राशास्त्रीय
- 3 प्रारंभिक भारतीय शिलालेखों में तांडव नृत्य
- 4 कला रूपों में प्रतीकवाद और उत्कृष्टता
- 5 तकनीकी परिवर्तन और प्रशासन
- 6 भूगोल और इतिहास का अंतर्संबंध
- 7 जीआई टैग (GI Tags) का सांस्कृतिक महत्व
- 8 अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (ICH) का संरक्षण और यूनेस्को की भूमिका
- 9 सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण
- 10 भारतीय समाज के मूल मूल्य

