सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण
|
डिजिटल संरक्षण और दस्तावेजीकरण (Digital Preservation) |
||
|
संस्था / मिशन |
पहल / सॉफ्टवेयर |
मुख्य उपलब्धि / कार्य |
|
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) |
NMMA (राष्ट्रीय स्मारक एवं पुरावशेष मिशन) |
1,18,359 पुरावशेषों और कलाकृतियों का डिजिटल दस्तावेजीकरण किया गया। |
|
ज्ञान भारतम मिशन |
राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन |
37 संस्थानों के सहयोग से 3.50 लाख पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण। |
|
C-DAC, पुणे |
"जतन" (Jatan) सॉफ्टवेयर |
संग्रहालयों के संग्रह का प्रबंधन और डिजिटलीकरण करने के लिए तकनीकी उपकरण। |
|
भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार (NAI) |
अभिलेख पटल (Abhilekh Patal) |
ऐतिहासिक दस्तावेजों और अभिलेखों का एक विशाल डिजिटल खजाना। |
|
NCAA |
राष्ट्रीय सांस्कृतिक दृश्य-श्रव्य अभिलेखागार |
दुर्लभ और लुप्तप्राय सांस्कृतिक दृश्य-श्रव्य रिकॉर्डिंग का संरक्षण। |
|
क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र (ZCC) |
7 मुख्यालय (पटियाला, तंजावुर आदि) |
संगीत, नृत्य और रंगमंच जैसी प्रदर्शन कलाओं का अनुसंधान और .... |
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 भारतीय चित्रकला का विकास
- 2 गुप्तकालीन मुद्राशास्त्रीय
- 3 प्रारंभिक भारतीय शिलालेखों में तांडव नृत्य
- 4 कला रूपों में प्रतीकवाद और उत्कृष्टता
- 5 तकनीकी परिवर्तन और प्रशासन
- 6 भूगोल और इतिहास का अंतर्संबंध
- 7 जीआई टैग (GI Tags) का सांस्कृतिक महत्व
- 8 अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (ICH) का संरक्षण और यूनेस्को की भूमिका
- 9 भारतीय समाज के मूल मूल्य
- 10 प्राचीन सभ्यता की अद्वितीय निरंतरता

