मथुरा कला शैली बनाम गांधार कला शैली (तुलनात्मक अंतर)

आधार

मथुरा कला शैली

गांधार कला शैली

उत्पत्ति

स्वदेशी विकास: पूर्णतः भारतीय आधार पर विकसित। बाद में गांधार से संपर्क हुआ।

विदेशी प्रभाव: ग्रीको-रोमन मानदंडों पर आधारित। इसे 'ग्रीको-बौद्ध' शैली भी कहते हैं।

सांस्कृतिक स्रोत

प्राचीन भारतीय परंपराओं (यक्ष प्रतिमाओं) और भरहुत-साँची कला से प्रेरित।

हेलेनिस्टिक विशेषताओं के साथ अकामेनियन, पार्थियन और बैक्ट्रियन परंपराओं का मिश्रण।

प्रयुक्त सामग्री

चित्तीदार लाल बलुआ पत्थर (Spotted Red Sandstone)

....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |

पूर्व सदस्य? लॉग इन करें


वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |

संबंधित सामग्री

मुख्य विशेष