प्रारंभिक भारतीय शिलालेखों में तांडव नृत्य
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ताण्डव नृत्य - एक परिचय |
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विषय |
विवरण |
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मुख्य देवता |
भगवान शिव (नटराज के रूप में)। |
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शब्द की व्युत्पत्ति |
'तन्' धातु से (अर्थ: स्पष्ट करना या प्रकट करना)। |
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मूल प्रकृति |
दिव्य ऊर्जा, शक्ति और ब्रह्मांडीय गति का नृत्य। |
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मुख्य संदेश |
सृजन, विनाश और निरंतर परिवर्तन का चक्र। |
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ऐतिहासिक साक्ष्य और शिलालेख |
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स्थान / शिलालेख |
काल (समय) |
प्रमुख विशेषताएँ |
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अजंता और एलोरा की गुफाएँ |
2वीं से 8वीं शताब्दी ईस्वी |
शिव के ताण्डव चित्रों के साथ देवी-देवताओं और अप्सराओं का अंकन। |
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भद्रवाह की गुफाएँ (म.प्र.) |
4वीं से 5वीं शताब्दी ईस्वी |
शिव का नटराज रूप; ब्रह्मांडीय ऊर्जा के प्रतीक वृत्त के भीतर नृत्य। |
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इलाहाबाद स्तंभ |
4वीं शताब्दी ईस्वी |
गुप्तकालीन कला का प्रभाव; नृत्य के विभिन्न दृश्यों का वर्णन। |
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देहरादून शिलालेख |
6वीं .... | |
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