भारत में शहरी लचीलापन: सतत अस्तित्व की रूपरेखा
विश्व बैंक ने 22 जुलाई, 2025 को आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के सहयोग से "टुवर्ड्स रेजिलिएंट एंड प्रॉस्पेरस सिटीज इन इंडिया" (Towards Resilient and Prosperous Cities in India) नामक रिपोर्ट जारी की।
- इस रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2050 तक भारतीय शहरों को ‘जलवायु-अनुकूल बुनियादी ढांचे एवं सेवाएं’ विकसित करने के लिए 2.4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की आवश्यकता होगी।
- ‘लोचशील शहरी विकास’ (Resilient Urban Development) से तात्पर्य ऐसी शहरी अवसंरचना और नीतिगत ढांचे की योजना, डिज़ाइन एवं क्रियान्वयन से है, जो जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदाओं, महामारियों और तीव्र शहरीकरण जैसी विविध चुनौतियों और दबावों का सामना करने, उनके ....
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