बाल श्रम पर (ILO) अभिसमय

भारत ने अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के दो मुख्य अभिसमयों की जून, 2017 में पुष्टि की है।

अभिसमय 138

यह अभिसमय रोजगार के लिए न्यूनतम सीमा से संबंधित है। इस अभिसमय को 26 जून, 1973 को अपनाया गया और 19 जून, 1976 को इसे लागू किया गया। अप्रैल, 2018 तक 171 देश इस अभिसमय की पुष्टि कर चुके हैं।

अभिसमय 138 के लिए देशों को आवश्यकता है-

  1. काम या रोजगार में प्रवेश के लिए एक न्यूनतम आयु निर्धारित करना।
  2. बाल श्रम उन्मूलन लिए राष्ट्रीय नीतियां बनाना।

हालांकि अभिसमय कार्य के लिए न्यूनतम आयु के रूप में 15 साल निर्धारित करता है। लेकिन विकासशील देशों के लिए एक संक्रमणकालीन उपाय (Transitional Measure) के रूप में न्यूनतम आयु 14 निर्धारित करने का विकल्प है, क्योंकि इससे वे अपनी शिक्षा प्रणाली और अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकते हैं।

अभिसमय 182

यह अभिसमय बाल श्रम के सबसे बुरे रूपों के निषेध और उन्मूलन के लिए तत्काल कार्रवाई से संबंधित है। इस अभिसमय को 17 जून, 1999 को अपनाया गया और 19 नवंबर, 2000 को इसे लागू किया गया। वर्तमान में 182 देश इस अभिसमय की पुष्टि कर चुके हैं।

प्रावधान

इस अभिसमय के उद्देश्य में, चाइल्ड (Child) शब्द उन सभी व्यक्तियों के लिए लागू होगा, जो 18 वर्ष से कम आयु के हों। इस अभिसमय के उद्देश्य में, बाल श्रम के सबसे खराब रूपों में शामिल हैं:

  1. गुलामी के समान सभी प्रकार की दासता प्रथाएं, जैसे कि बच्चों की बिक्री और तस्करी (बंधुआ मजदूरी और मजबूर या अनिवार्य श्रम), सशस्त्र संघर्ष में बच्चों की जबरन या अनिवार्य भर्ती।
  2. अश्लील साहित्य या अश्लील प्रदर्शन के लिए और वेश्यावृत्ति के लिए किसी बच्चे का उपयोग।
  3. अंतर्राष्ट्रीय संधियों में परिभाषित ड्रग्स उत्पादन और तस्करी जैसे गैरकानूनी गतिविधियों के लिए बच्चों का उपयोग।
  4. ऐसा कोई कार्य जो प्रग्ति या परिस्थितियों के अनुसार बच्चों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और आत्मविश्वास के लिए नुकसानदायकहो।