जनजातीय उप-योजना (TSP) क्षेत्रों में आश्रम विद्यालयों की स्थापना

यह योजना 1990-91 से संचालित की जा रही है तथा इसे वित्त वर्ष 2008-09 में संशोधित की गई। इस योजना का उद्देश्य अनुसूचित जनजाति समूह को आवासीय विद्यालय उपलब्ध कराकर छात्रों में साक्षरता दर को बढ़ाना है; जिससे उन्हें देश की अन्य आबादी के बराबर लाया जा सके।

योजना की विशेषताएं

यह केन्द्र द्वारा प्रायोजित योजना है, जो राज्यों एवं संघ राज्य क्षेत्रों की जनजातीय उप-योजना में संचालित की जा रही है।

  • इस योजना में प्रारम्भिक, मध्यम माध्यमिक, उच्च माध्यमिक स्तर तक की शिक्षा को शामिल किया गया है।
  • इस संशोधित योजना के तहत राज्य सरकार को टीएसपी क्षेत्रों में लड़कियों के लिए आश्रम विद्यालय की स्थापना हेतु 100% कोष उपलब्ध कराया जाता है तथा नक्सल प्रभावित टीएसपी क्षेत्रों (मंत्रालय द्वारा समय-समय पर पहचाने गए) में लड़कों के लिए भी आश्रम विद्यालय के निर्माण हेतु कोष उपलब्ध कराया जाता है।
  • केन्द्रीय सहायता जारी होने के दो साल में ही आश्रम विद्यालय का निर्माण पूरा करना होता है।

सुझाव

ऐसे स्कूलों में अंग्रेजी भाषा पर बहुत अधिक जोर दिया जाता है। चूंकि योजना का मकसद उचित प्राथमिक शिक्षा सुनिश्चित करना है, इसलिए बच्चों को स्थानीय भाषा में पढ़ाया जाना चाहिए, ताकि वे बेहतर तरीके से समझ और सीख सकें।

जनजातीय उप-योजना

  • जनजातीय उप-योजना (टीएसपी) एक विकास रणनीति है, जो आदिवासी लोगों का तेजी से सामाजिक-आर्थिक विकास सुनिश्चित करता है।
  • यह राज्य/केंद्रशासित प्रदेश की वार्षिक योजना का हिस्सा होता है। टीएसपी से राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के आदिवासी और आदिवासी क्षेत्रों को दिए गए लाभ राज्य/केंद्रशासित प्रदेश की समग्र योजना के अतिरिक्त होता है।
  • जनजातीय उप-योजना के तहत प्रदान की गई धनराशि प्रत्येक राज्य/संघ राज्य क्षेत्र की कम से कम एसटी आबादी के अनुपात में होनी चाहिए।