आयुर्वेद पांडुलिपियों का लिप्यंतरण हेतु आयुष मंत्रालय द्वारा कार्यशाला का आयोजन
15 जून 2026 को, आयुष मंत्रालय ने 'ज्ञान भारतम मिशन' के अंतर्गत उडुपी (कर्नाटक) में एक क्षमता-निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया। इसका मुख्य उद्देश्य तिगलारी और पुरानी कन्नड़ लिपियों में रचित आयुर्वेद पांडुलिपियों का लिप्यंतरण (Transliteration) करना था।
तिगलारी लिपि: एक परिचय
- ब्राह्मी मूल: तिगलारी एक दक्षिणी ब्राह्मी लिपि है। ऐतिहासिक रूप से इसका उपयोग तुलु, कन्नड़ और संस्कृत भाषाओं को लिखने के लिए किया जाता था।
- वैदिक महत्व: इस लिपि का प्राथमिक उपयोग संस्कृत में वैदिक ग्रंथों को लिपिबद्ध करने के लिए किया गया था।
- उत्पत्ति और विकास: यह लिपि 'ग्रंथ' (Grantha) लिपि से विकसित हुई मानी जाती है।
- प्राचीनतम प्रमाण: इस ....
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