स्वदेशी शिल्प और सांस्कृतिक विरासत को जीआई (GI) मान्यता

जून 2026 में, भारत सरकार की जीआई रजिस्ट्री ने स्वदेशी शिल्प और विरासत के संरक्षण हेतु विभिन्न राज्यों के कई पारंपरिक उत्पादों को भौगोलिक संकेत (GI) टैग प्रदान किया।

गुजरात

  • जसदान पटारी हस्तशिल्प: राजकोट के पास जसदान में निर्मित, ये सागौन की लकड़ी के बक्से हैं जिन पर पीतल और तांबे का जटिल काम होता है। बड़े बक्सों को 'पटारा' और छोटों को 'पटारी' कहा जाता है।

त्रिपुरा

  • त्रिपुरा सारिंदा: यह लकड़ी के एक टुकड़े से बना स्वदेशी तार वाला वाद्ययंत्र (bowed instrument) है, जिसका उपयोग आदिवासी समुदायों द्वारा लोक संगीत में किया जाता है।

असम

  • कार्बी आंगलोंग हैंडलूम: यह ....


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