रिकॉर्ड रेमिटेंस: प्रवासी भारतीयों से भारत को 110 अरब डॉलर
वित्त वर्ष 2025-26 में विदेशों में कार्यरत भारतीयों ने 110.47 अरब डॉलर भारत भेजे, जो अब तक का सर्वाधिक वार्षिक प्रेषण (Remittance) है। कमजोर पूंजी प्रवाह, पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच इन प्रेषणों ने भारत के बाह्य क्षेत्र (External Sector) को महत्वपूर्ण सहारा प्रदान किया।
रेमिटेंस क्या है?
रेमिटेंस वह धनराशि है जिसे प्रवासी श्रमिक या विदेश में रहने वाले नागरिक अपने परिवारों और रिश्तेदारों को स्वदेश भेजते हैं। भारत के भुगतान संतुलन (Balance of Payments) में यह चालू खाते (Current Account) का महत्वपूर्ण हिस्सा है और विदेशी मुद्रा अर्जन का प्रमुख स्रोत माना जाता है।
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 बीमा क्षेत्र में 100% FDI को मंजूरी
- 2 ग्रेट निकोबार परियोजना: राष्ट्रीय सुरक्षा बनाम पारिस्थितिकी और आदिवासी अधिकार
- 3 नकली वकील : कानूनी पेशे में संकट
- 4 मई 2026 के घटनाक्रम पर आधारित
- 5 पुरस्कार एवं सम्मान
- 6 नियुक्ति और त्यागपत्र
- 7 रक्षा (Defense)
- 8 खेल समाचार
- 9 अर्थव्यवस्था
- 10 पर्यावरण एवं पारिस्थिकी
- 1 भारत का फिनटेक इकोसिस्टम और मेटा–CRED डील
- 2 भारत–अमेरिका व्यापार वार्ता के मायने
- 3 आरबीआई का रिकॉर्ड अधिशेष हस्तांतरण
- 4 सेबी के नए सुधार: पूंजी बाज़ार को मिलेगी नई गति
- 5 सकल FDI बनाम शुद्ध FDI
- 6 FCNR(B) जमा योजना: विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने की RBI की नई पहल
- 7 आरबीआई की मौद्रिक नीति: रेपो दर 5.25% पर बरकरार
- 8 सरकारी बॉन्ड में विदेशी निवेशकों को कर छूट
- 9 WPI से PPI: आर्थिक आँकड़ों की नई परिभाषा
- 10 MSCI रीबैलेंसिंग और भारतीय शेयर बाजार पर इसका प्रभाव
- 11 रुपये का अवमूल्यन: कारण, प्रभाव एवं RBI की भूमिका

