रुपये का अवमूल्यन: कारण, प्रभाव एवं RBI की भूमिका
हाल के महीनों में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले तेज़ी से कमजोर हुआ है और विनिमय दर लगभग ₹96 प्रति डॉलर तक पहुँच गई है। इसने भारत की बाह्य आर्थिक स्थिरता, मुद्रास्फीति और विनिमय दर प्रबंधन को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
रुपये के अवमूल्यन के प्रमुख कारण
- चालू खाता घाटा (Current Account Deficit): भारत कच्चे तेल, सोना, इलेक्ट्रॉनिक्स आदि का बड़ा आयातक है। आयात निर्यात से अधिक होने के कारण डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर होता है।
- पूंजी बहिर्वाह (Capital Outflows): विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) द्वारा निवेश निकालने पर वे रुपये को डॉलर में ....
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