कृषि अर्थव्यवस्था में प्रौद्योगिकी के समावेशन से संबंधित पर्यावरणीय एवं नैतिक मुद्दे
- नवीन प्रौद्योगिकी बनाम जैव विविधता संरक्षणः जैव प्रौद्योगिकी का उपयोग कर कृषि उत्पादकता को बढ़ाया तो जा सकता है मगर इसके साथ ही इनसे जैव विविधता की हानि होने की भी संभावना होती है। आनुवंशिक संशोधन का प्रयोग कर आनुवंशिक रूप से संशोधित पशु और फसलों का उत्पादन किया जा सकता है।
- ऐसा संभव है कि नई प्रजातियां अधिक प्रभावशाली सिद्ध हो और मौजूदा प्रजातियां खत्म हो जाए।
- बड़े कृषक अधिक धनी एवं गरीब कृषक अधिक विपन्नः उन्नत प्रौद्योगिकी आमतौर पर महंगी होती है और गरीब एवं सीमांत किसानों द्वारा अपनाए जाने की राह में अनेक बाधाएं होती हैं। उदाहरण के लिए ....
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संबंधित सामग्री
- 1 विविध
- 2 फ्रंटियर फ्रेमवर्क और अनुप्रयुक्त विज्ञान
- 3 वैकल्पिक ऊर्जा
- 4 रक्षा प्रणालियाँ और स्वदेशीकरण (Defence Systems & Indigenization)
- 5 स्वास्थ्य और चिकित्सा विज्ञान
- 6 अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी
- 7 सूचना प्रौद्योगिकी, कंप्यूटर और रोबोटिक्स
- 8 जैव प्रौद्योगिकी और जीन प्रौद्योगिकी
- 9 कृषि में प्रौद्योगिकी के समावेशन से जुड़ी सरकार की पहलें
- 10 कृषि क्षेत्र में तकनीकी नवाचार के माध्यम से सामाजिक समावेशन

