रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता: निर्भरता से क्षमता-संपन्नता तक भारत की प्रगति
रक्षा मंत्रालय द्वारा हाल ही में प्रदान की गई जानकारी के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन 1.54 लाख करोड़ रुपए के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया है।
- भारत 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' जैसी पहलों के माध्यम से रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता को त्यागकर वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर है।
- यह यात्रा ‘निर्भरता से क्षमता-संपन्नता’ की ओर भारत की रणनीतिक प्रगति को दर्शाती है।
निर्भरता के जोखिम
- रणनीतिक भेद्यता: महत्वपूर्ण सैन्य उपकरणों की आपूर्ति के लिए विदेशी शक्तियों पर निर्भरता ने भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को सीमित कर दिया ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 भारत में शहरी इमारतों की अग्नि सुभेद्यता: कारण, प्रभाव और समाधान
- 2 भारत में बढ़ता कैंसर का बोझ: चुनौतियाँ, कारण और रणनीतिक समाधान
- 3 आपदा प्रबंधन में ‘स्मार्ट एआई कैशिंग’ और 'कोऑपरेटिव कैशिंग' की भूमिका
- 4 भारत-कनाडा संबंध:अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध की चुनौती
- 5 राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव: पहली बार CEO की नियुक्ति क्यों?
- 6 कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र डेटा लीक: भारत की साइबर सुरक्षा के लिए चेतावनी
- 7 किशोर मानसिक स्वास्थ्य बनाम डिजिटल व्यसन
- 8 जी-7 में भारत: बदलती पश्चिमी दुनिया और नई रणनीति
- 9 भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग का भविष्य
- 10 अध्यादेश और न्यायिक स्वतंत्रता

