खाद्य प्रणालियों का रूपांतरण: भोजन, पर्यावरण और जलवायु संकट के बीच संतुलन की चुनौती
भोजन अब मात्र पोषण का माध्यम नहीं रहा, वह पृथ्वी के भविष्य की दिशा तय करने वाला सबसे निर्णायक तत्व बन चुका है। ईएटी-लैंसेट कमीशन (EAT-Lancet Commission) द्वारा हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, जलवायु परिवर्तन, जैव-विविधता क्षय, मीठे जल का तेजी से घटता भंडार, तथा प्रदूषण जैसे जिन संकटों ने आज मानवता को घेर रखा है उनके केंद्र में खाद्य प्रणाली ही है।
- अकेला खाद्य क्षेत्र ही वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में लगभग 30 प्रतिशत योगदान देता है। इसलिए परिवर्तन की आवश्यकता अब विकल्प नहीं, अनिवार्यता है।
खाद्य प्रणाली क्या है?
- “खाद्य प्रणाली” से तात्पर्य उस पूरी शृंखला ....
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