'गंगा सॉफ्ट-शेल कछुआ'
हाल ही में, 15 मई (लुप्तप्राय प्रजाति दिवस) को असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में भारत का पहला सैटेलाइट-टैग किया गया 'गंगा सॉफ्ट-शेल कछुआ' छोड़ा गया।
मुख्य बिंदु
- गंगा सॉफ्ट-शेल कछुआ (Nilssonia gangetica) भारतीय उपमहाद्वीप की नदी प्रणालियों में पाया जाने वाला मीठे पानी का कछुआ है।
- इसे IUCN रेड लिस्ट में 'लुप्तप्राय' (Endangered) और WPA, 1972 की अनुसूची I के तहत संरक्षित किया गया है।
- यह ब्रह्मपुत्र नदी के बाढ़ के मैदानों में छोड़ा गया है।
संबंधित मूलभूत अवधारणाएँ
- सैटेलाइट टैगिंग: जानवर के शरीर पर एक ट्रांसमीटर लगाना, जिससे उसकी गतिविधि, प्रवास और व्यवहार का डेटा सैटेलाइट के जरिए प्राप्त किया ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी
- 1 भारत की 1% सतत विमानन ईंधन सम्मिश्रण योजना
- 2 भारत-नॉर्वे हरित रणनीतिक साझेदारी
- 3 पैंगोलिन की तस्करी रोकने के लिए 'जेनेटिक मैप'
- 4 एथेनोल 'ब्लेंडेड ईंधन' के नए मानक
- 5 भारत ने संयुक्त राष्ट्र को सौंपे नए जलवायु लक्ष्य
- 6 पुणे में भारत का पहला लो एमिशन ज़ोन
- 7 तिमोर ग्रीन पिजन पर विलुप्त होने का गहरा संकट
- 8 कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2026
- 9 भारत में रूफटॉप सोलर ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि
- 10 दिल्ली में ग्राउंड-लेवल ओजोन प्रदूषण का संकट
- 11 इकोसाइड: पर्यावरण विनाश का अपराधीकरण

