प्रधानमंत्री फ़सल बीमा योजना (पीएमएफ़बीवाई)

यह एक बीमाकृत प्रीमियम आधारित योजना है, जिसका उद्देश्य भारतीय किसानों को भारतीय मानसून की अनिश्चितता के दुष्प्रभाव से बचाना है। यह योजना प्राकृतिक जोखिमों से फसल के नुकसान की भरपाई करता है। यह बुवाई पूर्व से लेकर कटाई के पश्चात तक के व्यापक जोखिमों से सुरक्षा प्रदान करती है। इसे ‘वन प्रीमियम - वन नेशन - वन स्कीम थीम’ पर संचालित की गयी है।

मुख्य विशेषताएं

किसान को खरीफ फसल के लिए 2%, रबी खाद्य और तिलहनी फसलों के लिए 1.5% तथा वार्षिक वाणिज्यिक/बागवानी फसलों के लिए 5% प्रीमियम का भुगतान करना होगा।

  • शेष प्रीमियम का भुगतान राज्य और केंद्र सरकार द्वारा समान रूप से वहन किया जाता है, ताकि किसी भी प्रकार की प्राकृतिक आपदाओं से फसल हानि की स्थिति में किसानों को पूर्ण बीमित राशि प्रदान की जा सके।
  • प्रीमियम दर को कम करने का प्रावधान हटा दिया गया है और किसान बिना किसी कटौती के पूरी बीमा राशि के हकदार हैं।
  • भुगतान के दावों में देरी को कम करने के लिए प्रौद्योगिकी का अनिवार्य उपयोग किया जाता है; जैसे फसल काटने के डेटा को एकत्रित एवं अपलोड करने हेतु स्मार्ट फोन, रिमोट सेंसिंग ड्रोन और जीपीएस तकनीक का इस्तेमाल करना।
  • सरकारी सब्सिडी पर कोई ऊपरी सीमा नहीं है। भले ही शेष प्रीमियम 90% हो। यह सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।

प्रगति

इस योजना ने प्राकृतिक आपदाओं के कारण नुकसान की स्थिति में दावों के त्वरित निपटान की सुविधा प्रदान की है।

  • राज्य सरकार की एजेंसियों ने फसल की पैदावार का आंकलन करने के लिए प्रौद्योगिकी (स्मार्ट फोन / सीसीई एग्री ऐप) के उपयोग से आंकलन की सटीकता में वृद्धि हुई है।
  • किसानों द्वारा दावा की जाने वाली बीमा राशि में वृद्धि हुई है।
  • फसल विविधीकरण में वृद्धि हुई है एवं उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती में वृद्धि हुई है।
  • नुकसान का आंकलन अधिक यथार्थवादी हो गया है, क्योंकि बीमा का इकाई क्षेत्र प्रमुख फसलों के लिए गांव/ग्राम पंचायत स्तर पर और स्थानीय आपदाओं के लिए खेत स्तर पर मापा जाता है।

सुझाव

कृषि क्षेत्र में अधिक निवेश के माध्यम से कृषि पूंजी निर्माण में वृद्धि करना।

  • बीमा दावा के संवितरण में भ्रष्टाचार का पता लगाना।
  • मानवीय त्रुटि को कम करने के लिए प्रौद्योगिकी के अनिवार्य उपयोग के प्रावधान का सख्त प्रवर्त्तन करना।
  • किसानों को कृषि-सलाह प्राप्त करने के लिए एम-पोर्टल और किसान सुविधा ऐप पर पंजीकरण को प्रोत्साहित करना।

चुनौतियां

  • उपज आंकड़ा के प्रसारण के लिए मैनुअल प्रक्रिया का उपयोग।
  • प्रीमियम सब्सिडी का राज्यों द्वारा देर से जारी किया जाना।
  • बीमा कंपनियों और राज्यों के बीच विवाद।
  • प्रीमियम सब्सिडी केंद्र और राज्य दोनों द्वारा समान रूप से वहन किये जाने के कारण राजकोषीय बाध्यता का बढ़ना।
  • कृषि पूंजी निर्माण के लिए उपलब्ध वित्त का पुनः आबंटन।