प्रतिस्पर्द्धा आयोग तथा व्यावसायिक समूहन की चुनौती
- हाल ही में भारत के प्रतिस्पर्द्धा आयोग (Competition Commission of India) ने अपनी जांच में पाया कि तीन बीयर कंपनियों ने एक दशक (2009-2018) के लिए बीयर की कीमतों को निश्चित करने के लिए व्यावसायिक समूहन या गुटबंदी (Cartelisation) की रणनीति अपनाई थी।
- आयोग ने इस पर कार्रवाई करते हुए 10 राज्यों तथा केन्द्रशासित प्रदेशों में बीयर की बिक्री तथा आपूर्ति में गुटबंदी (Cartelisation) के लिए इन कंपनियों पर 873 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है।
भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग
- भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग (CCI) का गठन केन्द्र सरकार द्वारा 14 अक्टूबर, 2003 को किया गया था तथा इसके माध्यम से प्रतिस्पर्धा अधिनियम, ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 रुपये का अवमूल्यन: कारण, प्रभाव एवं RBI की भूमिका
- 2 MSCI रीबैलेंसिंग और भारतीय शेयर बाजार पर इसका प्रभाव
- 3 WPI से PPI: आर्थिक आँकड़ों की नई परिभाषा
- 4 सरकारी बॉन्ड में विदेशी निवेशकों को कर छूट
- 5 आरबीआई की मौद्रिक नीति: रेपो दर 5.25% पर बरकरार
- 6 FCNR(B) जमा योजना: विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने की RBI की नई पहल
- 7 रिकॉर्ड रेमिटेंस: प्रवासी भारतीयों से भारत को 110 अरब डॉलर
- 8 सकल FDI बनाम शुद्ध FDI
- 9 सेबी के नए सुधार: पूंजी बाज़ार को मिलेगी नई गति
- 10 आरबीआई का रिकॉर्ड अधिशेष हस्तांतरण

