मंगोलियाई कंजुर हस्तलेख का पुनर्मुद्रण
संस्कृति मंत्रालय ने राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन (National Mission for Manuscripts- NMM) के तहत मंगोलियाई कंजुर (Mongolian Kanjur) के 108 अंकों के पुनर्मुद्रण करने से संबंधित परियोजना आरंभ की है।
- एनएमएम के तहत मंगोलियाई कंजुर के पांच पुनर्मुद्रित अंकों का पहला सेट 4 जुलाई, 2020 को धर्म चक्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को भेंट किया गया। ऐसी उम्मीद है कि मार्च, 2022 तक मंगोलियाई कंजुर के सभी 108 अंक प्रकाशित कर दिए जाएंगे।
मंगोलियाई कंजुर
- 108 अंकों का बौद्ध धर्म वैधानिक ग्रंथ मंगोलियाई कंजुर मंगोलिया में सर्वाधिक महत्वपूर्ण धर्म ग्रंथ माना जाता है। मंगोलियाई भाषा में ‘कंजुर‘ का अर्थ ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 वाराणसी में ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की दूसरी बैठक
- 2 आयुर्वेद पांडुलिपियों का लिप्यंतरण हेतु आयुष मंत्रालय द्वारा कार्यशाला का आयोजन
- 3 राखीगढ़ी के अवशेष: सिंधु-सरस्वती सभ्यता के रहस्यों का वैज्ञानिक विश्लेषण
- 4 स्वदेशी शिल्प और सांस्कृतिक विरासत को जीआई (GI) मान्यता
- 5 NCERT पाठ्यपुस्तक में 'डांसिंग गर्ल' की मूल तस्वीर लगाने का निर्णय
- 6 जम्मू-कश्मीर ने सूफियाना संगीत के लिए यूनेस्को (UNESCO) मान्यता की मांग की
- 7 ओडिशा में मिले 15 मिलियन वर्ष पुराने जीवाश्म: प्राचीन समुद्री इतिहास के प्रमाण
- 8 चोल कालीन अनैमंगलम ताम्रपत्र
- 9 पानज़थ नाग चश्मा संरक्षण उत्सव
- 10 भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर मंदिर घोषित

