डीप टेक स्टार्टअप्स एवं भारत का विकास प्रतिमान : प्रौद्योगिकीय निर्भरता से नवाचार-आधारित आत्मनिर्भरता की ओर
भारत का स्टार्टअप पारितंत्र परंपरागत रूप से फिनटेक, सॉफ्टवेयर ऐज़ अ सर्विस (SaaS) और उपभोक्ता इंटरनेट प्लेटफॉर्मों के प्रभुत्व में रहा है। किंतु वैश्विक आपूर्ति शृंखला में व्यवधान, भू-राजनीतिक तनाव तथा कुछ चुनिंदा देशों में प्रौद्योगिकी का संकेन्द्रण, इन व्यवस्थाओं की संरचनात्मक कमजोरियों को उजागर करता है।
- भारत में डीप टेक स्टार्टअप की परिभाषा में हाल में किया गया संशोधन, जिसके अंतर्गत पात्रता अवधि को 20 वर्ष तक बढ़ाया गया है तथा वार्षिक टर्नओवर की सीमा 300 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है, नीतिगत स्तर पर एक संरचनात्मक परिवर्तन का संकेत देता है।
- यह परिवर्तन एक व्यापक विकास प्रतिमान को अभिव्यक्त ....
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