इस्पात क्षेत्र का विकार्बनीकरण भारत के लिए आर्थिक आवश्यकता और पर्यावरणीय दायित्व

यूरोपीय संघ का कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) जनवरी 2026 से प्रभावी हुआ। यह तंत्र लौह एवं इस्पात तथा उर्वरकों जैसे अधिक कार्बन-गहन उत्पादों के उत्पादन के दौरान उत्पन्न ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन पर कार्बन शुल्क लागू करता है।

  • भारत के EU को निर्यात में लगभग 90% हिस्सा लौह एवं इस्पात का है, जो CBAM के दायरे में आता है। इससे भारतीय उत्पादकों को गंभीर प्रतिस्पर्धी और नियामक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
  • इस पृष्ठभूमि में इस्पात निर्माण में स्क्रैप की हिस्सेदारी बढ़ाने पर भारत का जोर उसकी ग्रीन स्टील पहल और उभरते वैश्विक धारणीयता मानकों के अनुरूप है।

इस्पात ....

क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |

पूर्व सदस्य? लॉग इन करें


वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |

संबंधित सामग्री

करेंट अफेयर्स के चर्चित मुद्दे