भारत में लुप्त होती झीलें: सामाजिक-पारिस्थितिक स्थिरता के लिए एक खतरा

हाल ही में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की एक ऑडिट रिपोर्ट में बताया गया है कि 1967 से अब तक जम्मू‑कश्मीर की लगभग आधी झीलें लुप्त हो चुकी हैं, जो इस क्षेत्र में बढ़ते पारिस्थितिक संकट को उजागर करती हैं।

झीलों का पारिस्थितिक महत्व

  • भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge): झीलें जलाशयों के रूप में कार्य करती हैं जो दीर्घकालिक जल सुरक्षा बनाए रखती हैं, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जो पीने और सिंचाई के लिए भूजल पर निर्भर हैं।
  • बाढ़ नियंत्रण: भारी वर्षा के दौरान, झीलें प्राकृतिक बफर के रूप में कार्य करती हैं; अतिरिक्त पानी को सोखकर ....
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