भारत में निष्क्रिय इच्छामृत्यु: नैतिक मुद्दे एवं चुनौतियाँ

भारत में निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति प्राप्त करने वाले पहले व्यक्ति हरीश राणा का हाल ही में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली में निधन हो गया। यह घटना चिकित्सा जगत के सबसे जटिल नैतिक प्रश्नों में से एक को पुनः केंद्र में ले आई है। उनका मामला केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का दर्पण है, जो जीवन के अंतिम निर्णयों को संवेदनशीलता, सुसंगतता और नैतिक स्पष्टता के साथ संभालने के लिए अभी भी पूर्णतः तैयार नहीं है, चाहे वह कानूनी दृष्टि से हो, या चिकित्सा दृष्टि से या नैतिक दृष्टि से।

अब मूलभूत प्रश्न यह ....

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