अंतरराष्ट्रीय क़ानून एवं आत्मरक्षा: आधुनिक संघर्षों में बदलते आयाम
अमेरिका-ईरान तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध, गज़ा में इज़राइल की सैन्य कार्रवाइयाँ तथा वेनेज़ुएला में अमेरिकी हस्तक्षेप जैसे घटनाक्रमों ने एक गंभीर बहस को जन्म दिया है कि क्या अंतरराष्ट्रीय क़ानून अब भी प्रासंगिक हैं
- विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रणनीतिकार इसे “नियम-विहीन विश्व” (Norm-Free World) की ओर बढ़ता हुआ मानते हुए, अंतरराष्ट्रीय क़ानून के पतन की आशंका व्यक्त कर रहे हैं।
- इस बहस के केंद्र में एक प्रमुख सिद्धांत है, आत्मरक्षा का अधिकार (Right to Self-Defence)।
कानूनी आधार: अंतरराष्ट्रीय विधि क्या कहती है?
- बल के प्रयोग या उसकी धमकी पर प्रतिबंध संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) में निहित है, जो द्वितीय ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 बच्चों के लिए डिजिटल सुरक्षा: अधिकार, जोखिम और नियामकीय अंतराल
- 2 ऊर्जा सुरक्षा: भारत का नया रणनीतिक दृष्टिकोण
- 3 भारत की जैव-अर्थव्यवस्था: नवाचार, अवसर और नीतिगत चुनौतियाँ
- 4 शहरी भारत की पुनर्कल्पना: एकीकृत, टिकाऊ और भविष्य-उन्मुख बुनियादी ढांचे की ओर
- 5 लोचशील आपूर्ति शृंखलाएँ: भारत की आर्थिक सुरक्षा का एक सुदृढ़ स्तंभ
- 6 भारत में सुदृढ़ नवाचार पारितंत्र का निर्माण: क्षमताएँ और संरचनात्मक बाधाएँ
- 7 प्रतीकात्मकता से परिवर्तन की ओर: भारत में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी
- 8 भारत में गिग कर्मियों के अधिकार: मान्यता बनाम वास्तविकता
- 9 भारत में निष्क्रिय इच्छामृत्यु: नैतिक मुद्दे एवं चुनौतियाँ
- 10 संप्रभु ऊर्जा आत्मनिर्भरता: भारत की रणनीतिक आवश्यकता
करेंट अफेयर्स के चर्चित मुद्दे
- 1 संप्रभु ऊर्जा आत्मनिर्भरता: भारत की रणनीतिक आवश्यकता
- 2 भारत में निष्क्रिय इच्छामृत्यु: नैतिक मुद्दे एवं चुनौतियाँ
- 3 भारत में गिग कर्मियों के अधिकार: मान्यता बनाम वास्तविकता
- 4 प्रतीकात्मकता से परिवर्तन की ओर: भारत में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी
- 5 भारत में सुदृढ़ नवाचार पारितंत्र का निर्माण: क्षमताएँ और संरचनात्मक बाधाएँ
- 6 लोचशील आपूर्ति शृंखलाएँ: भारत की आर्थिक सुरक्षा का एक सुदृढ़ स्तंभ
- 7 शहरी भारत की पुनर्कल्पना: एकीकृत, टिकाऊ और भविष्य-उन्मुख बुनियादी ढांचे की ओर
- 8 भारत की जैव-अर्थव्यवस्था: नवाचार, अवसर और नीतिगत चुनौतियाँ
- 9 ऊर्जा सुरक्षा: भारत का नया रणनीतिक दृष्टिकोण
- 10 बच्चों के लिए डिजिटल सुरक्षा: अधिकार, जोखिम और नियामकीय अंतराल

