गाँधी एवं नेहरू के सामाजिक-आर्थिक विचार: समानता एवं विभेद
महात्मा गाँधी एवं जवाहरलाल नेहरु के सामाजिक - आर्थिक विचार उस समय के भारत एवं विश्व की स्थिति से प्रभावित थे।
- नेहरू का सम्पूर्ण आर्थिक दर्शन समाजवादी विचारधारा पर आधारित था और उनका समाजवाद केवल आर्थिक संगठन का साधन मात्र न होकर एक जीवन का दर्शन था। वे मैक्स एडलर की भांति समाजवादी थे।
- गाँधी और नेहरु के सामाजिक-आर्थिक दृष्टिकोण देश द्वारा सामना की जाने वाली समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करता है जो वर्तमान में भी प्रासंगिक है।
गाँधी और नेहरु के सामाजिक-आर्थिक विचार: समानता
- अस्पृश्यताः गाँधी एवं नेहरु दोनों ही समाज में व्याप्त अस्पृश्यता के विरोधी थे। गाँधी जी के अनुसार, ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 भारतीय चित्रकला का विकास
- 2 गुप्तकालीन मुद्राशास्त्रीय
- 3 प्रारंभिक भारतीय शिलालेखों में तांडव नृत्य
- 4 कला रूपों में प्रतीकवाद और उत्कृष्टता
- 5 तकनीकी परिवर्तन और प्रशासन
- 6 भूगोल और इतिहास का अंतर्संबंध
- 7 जीआई टैग (GI Tags) का सांस्कृतिक महत्व
- 8 अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (ICH) का संरक्षण और यूनेस्को की भूमिका
- 9 सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण
- 10 भारतीय समाज के मूल मूल्य

