कांटेदार बांस का सबसे पुराना अवशेष

  • हाल ही में मणिपुर की इम्फाल घाटी में चिरांग नदी के गाद-युक्त निक्षेपों में जीवाश्म पौधों के अवशेषों की जाँच कर रहे शोधकर्ताओं को एक अक्षुण कांटेदार बाँस का तना प्राप्त हुआ है।
  • यह एशिया का सबसे प्राचीन काँटेदार बाँस का जीवाश्म है। यह चिमोनोबम्बुसा (Chimonobambusa) वंश से संबंधित है।
  • बाँस को हरा सोना भी कहा जाता है। यह घास कुल से संबंधित एक प्रकार का काष्ठीय पादप है।
  • यह सबसे तेजी से बढ़ने वाले पादपों में से एक है। बांस का उपयोग बायो-इथेनॉल बनाने, फर्नीचर निर्माण, कागज़ उद्योग, औषधि निर्माण आदि क्षेत्रों में किया जाता है।
  • सितंबर 2025 में असम के गोलाघाट ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |

पूर्व सदस्य? लॉग इन करें


वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |

संबंधित सामग्री

पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी