वैश्विक जलवायु शासन का पुनर्मूल्यांकन कॉप-30 एवं सतत भविष्य की दिशा - आलोक सिंह
वैश्विक जलवायु संकट अब निर्णायक दशक में प्रवेश कर चुका है। औद्योगिक युग-पूर्व स्तरों की तुलना में तापमान 1.2°C से अधिक हो गया है और महाद्वीपों में जलवायु-जनित आपदाएँ लगातार तीव्र होती जा रही हैं। ऐसे समय में एक अधिक न्यायसंगत और प्रभावी जलवायु शासन व्यवस्था की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। ब्राज़ील के बेलेम में आयोजित COP30 सम्मेलन उस ऐतिहासिक मोड़ पर संपन्न हुआ जब वर्तमान में वैश्विक जलवायु राजनीति गहरे विभाजन से जूझ रही है, जलवायु वित्तीय प्रतिबद्धताएँ डगमगा रही हैं और राष्ट्र आर्थिक प्राथमिकताओं को पारिस्थितिक अनिवार्यताओं के साथ संतुलित करने के लिए संघर्ष ....
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