भू-आर्थिक टकराव के दौर में भारत चुनौतियां, प्रत्यास्थता एवं रणनीतिक प्रत्युत्तर - आलोक सिंह

वैश्विक शक्ति प्रतिद्वंद्विताएं अब पारंपरिक युद्ध के बजाय आर्थिक प्रभाव, नियंत्रण और आपूर्ति शृंखला प्रतिस्पर्धा के माध्यम से उभर रही हैं। यह परिवर्तन अंतरराष्ट्रीय संबंधों को नया आकार दे रहा है और राष्ट्रीय सुरक्षा ढाँचों को पुनर्परिभाषित कर रहा है। इस पृष्ठभूमि में एक तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और गहरे वैश्विक जुड़ाव के साथ भारत को महत्वपूर्ण रणनीतिक और आर्थिक चुनौतियों के साथ-साथ नए अवसर भी मिल रहे हैं।

विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वैश्विक जोखिम रिपोर्ट 2026 के अनुसार, भू-आर्थिक टकराव (Geoeconomic Confrontation) आज का सबसे बड़ा वैश्विक जोखिम बनकर उभरा है। इसने पारंपरिक राज्य-आधारित युद्धों और यहाँ तक कि ....

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