पश्चिम एशियाई संकट : भू-राजनीतिक द्वंद्व, ऊर्जा सुरक्षा और भारत के रणनीतिक सरोकार - आलोक सिंह

ईरान, इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका के मध्य गहराते टकराव ने पश्चिम एशिया को प्रत्यक्ष और छद्म युद्ध के एक बेहद अस्थिर दौर में धकेल दिया है, जिससे एक व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष की आशंकाएं उत्पन्न हो गई हैं। महत्वपूर्ण ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले और होर्मुज़ जलडमरूमध्य के आस-पास के व्यवधानों ने कच्चे तेल की कीमतों, शिपिंग लागतों और वैश्विक बाजार की अनिश्चितता में भारी उछाल ला दिया है। यह उथल-पुथल केवल भू-राजनीतिक नहीं है, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति शृंखला की स्थिरता से गहराई से जुड़ी हुई है। उच्च आयात निर्भरता और इस क्षेत्र के साथ मजबूत संबंधों वाले ....

क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें

वार्षिक सदस्यता लें मात्र 600 में और पाएं...
पत्रिका की मासिक सामग्री, साथ ही पत्रिका में 2018 से अब तक प्रकाशित सामग्री।
प्रारंभिक व मुख्य परीक्षा पर अध्ययन सामग्री, मॉक टेस्ट पेपर, हल प्रश्न-पत्र आदि।
क्रॉनिकल द्वारा प्रकाशित चुनिंदा पुस्तकों का ई-संस्करण।
पप्रारंभिक व मुख्य परीक्षा के चुनिंदा विषयों पर वीडियो क्लासेज़।
क्रॉनिकल द्वारा प्रकाशित पुस्तकों पर अतिरिक्त छूट।
आलेख