भारत का भू-स्खलन एटलस
हाल ही में, हैदाराबाद स्थित इसरो के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (ISRO’s National Remote Sensing Centre - NRSC) द्वारा भारत का एक भू-स्खलन एटलस जारी किया गया है। यह भारत के लिए विशेष महत्व का है, क्योंकि भारत वैश्विक स्तर पर शीर्ष पांच भूस्खलन-प्रवण देशों में से एक है।
मुख्य बिंदु
- रिपोर्ट का आधार: भारत में मुख्य रूप से हिमालय और पश्चिमी घाट भूस्खलन से सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र है अतः इस एटलस को तैयार करने में इस क्षेत्र में आने वाले भूस्खलन को मुख्यतः आधार बनाया गया है।
- उपग्रह: इसरो ने भूस्खलन का अध्ययन करने के लिए रिसोर्ससैट-1 और 2 आदि ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 चंबल नदी में घटता प्रवाह डॉल्फिन आवास के लिए खतरा
- 2 असम में “बेंट-टोड गेको” की नई प्रजाति की खोज
- 3 भारत का पहला वॉटर न्यूट्रल कोचिंग डिपो
- 4 भारत का प्रथम राष्ट्रीय चमगादड़ आकलन
- 5 भारतीय सॉफ्टशेल कछुए की तस्करी से बचाव
- 6 कश्मीर में साही का खतरा एवं केसर उत्पादन पर प्रभाव
- 7 ग्रेट इंडियन बस्टर्ड
- 8 BRIC की पहली अनुसंधान सलाहकार बोर्ड बैठक
- 9 बाल्टिक सागर में फंसी हंपबैक व्हेल
- 10 मेक्सिको की खाड़ी में राइस व्हेल पर विलुप्ति का खतरा

