भारत-रूस संबंध: परिवर्तनशील वैश्विक व्यवस्था में साझेदारी का विस्तार - संपादकीय डेस्क
शीत युद्ध के बाद से भारत और रूस ने एक मजबूत रणनीतिक साझेदारी कायम रखी है। इस साझेदारी को दोनों देशों के मध्य विकसित रक्षा, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सहयोग द्वारा देखा जा सकता है। विगत कुछ वर्षों में भारत ने अमेरिका तथा अन्य पश्चिमी देशों के साथ अपने संबंधों में सुधार किया है। इस बीच, रूस एवं चीन के संबंधों में भी वृद्धि देखने को मिली है। इससे भारत एवं रूस के परंपरागत विकसित संबंधों में जटिलताएं उत्पन्न हुई हैं। भारत-रूस की निकटता वैश्विक रणनीतिक संरेखण को आकार दे रही है तथा इसका प्रभाव ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 अमेरिका–ईरान इस्लामाबाद समझौता: पश्चिम एशिया में नई कूटनीतिक शुरुआत
- 2 अल नीनो : भारत के लिए एक गंभीर विकासात्मक चुनौती क्यों?
- 3 भारत का अप्रत्याशित 'बेबी बस्ट': विश्व के लिए एक जनसांख्यिकीय चेतावनी
- 4 भारत में रोजगार योग्यता संकट: डिग्री और कौशल के बीच बढ़ती खाई
- 5 16वाँ वित्त आयोग: कर-वितरण, उपकर और संघीय संतुलन का प्रश्न
- 6 भारत में ध्वनि प्रदूषण : पर्यावरणीय न्याय की नई चुनौती
- 7 एक्स्ट्रागैलेक्टिक जेट्स: ब्रह्मांड की सबसे शक्तिशाली लेज़र बीम
- 8 भारत–यूएई संबंध : ऊर्जा सुरक्षा से व्यापक रणनीतिक साझेदारी तक
- 9 भारत में जैव-ऊर्जा की संभावनाएं हरित ऊर्जा संक्रमण का आधार - आलोक सिंह
- 10 पश्चिम एशियाई संकट : भू-राजनीतिक द्वंद्व, ऊर्जा सुरक्षा और भारत के रणनीतिक सरोकार - आलोक सिंह

