श्वसन में आर्सेनिक उपयोग करने वाले सूक्ष्मजीव

29 अप्रैल, 2019 को प्रकाशित ‘प्रोसीडिंग्स ऑफ नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज’ के अनुसार वैज्ञानिकों ने प्रशांत महासागर के अल्प ऑक्सीजन वाले हिस्सों में आर्सेनिक से सांस लेने वाले सूक्ष्मजीवों की खोज की है; जबकि अधिकांश जीवों के लिए आर्सेनिक एक घातक जहर है। अमेरिका के वाशिंगटन विश्वविद्यालय (UW) के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया यह अध्ययन प्रकाशित किया गया। ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में इस क्षेत्र के सूक्ष्मजीव, खाद्य पदार्थ से ऊर्जा निष्कर्षण के लिए इलेक्ट्रॉन ग्राही (electron acceptor) के रूप में अन्य यौगिकों का उपयोग करते हैं, जैसे- नाइट्रोजन और सल्फर के ऑक्सीकृत रूप (oxidçed forms of nitrogen and sulfur)।

महत्व

  • जीव-विज्ञानियों के अनुसार श्वास के रूप में ऑक्सीजन की जगह आर्सेनिक ग्रहण करने का यह तरीका पृथ्वी के प्रारंभिक इतिहास का ही एक अवशेष है।
  • उस वक्त जब पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति हुई थी, ऑक्सीजन की मात्र वायु एवं महासागरों दोनों में दुर्लभ थी। व्यापक रूप से प्रकाश संश्लेषण होने तथा कार्बन डाइऑक्साइड के ऑक्सीजन के रूप में परिवर्तित होने के बाद ही पृथ्वी के वातावरण में ऑक्सीजन की प्रचुरता हो पाई।
  • इस कारण से प्रारंभिक जीवरूपों ने ऊर्जा प्राप्त करने के लिए अन्य तत्वों, जैसे कि आर्सेनिक का सहारा लिया_ विदित हो कि उस समय महासागरों में आर्सेनिक की मात्र प्रचुर रूप में पाई जाती थी।
  • जीव-विज्ञानियों के अनुसार श्वास के रूप में आर्सेनिक ग्रहण करने वाले जीवों की आबादी जलवायु परिवर्तन के चलते फिर से बढ़ सकती है। साथ ही ऑक्सीजन न्यून क्षेत्रें का विस्तार होने तथा समुद्री पारिस्थितिक तंत्र में घुली हुई ऑक्सीजन की मात्रा के कम होने का अनुमान भी व्यक्त किया गया है।