पुनर्योजी कृषि : आवश्यकता, चुनौतियां एवं समाधान
पुनर्योजी कृषि (Regenerative Agriculture) कृषि की एक ऐसी पद्धति है, जिसमें मृदा के स्वास्थ्य को केंद्रीय महत्व दिया जाता है। जब मृदा या मिट्टी स्वस्थ होती है, तो इसके माध्यम से अधिक उपज प्राप्त की जा सकती है। कृषि की यह पद्धति ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने सहित उद्योग के नकारात्मक पर्यावरणीय प्रभाव को कम कर सकती है। यह लोगों की भोजन और पोषण की आवश्यकताओं की पूर्ति करने में भी सहायक है।
- पुनर्योजी कृषि पद्धति मिट्टी की जल अवशोषण क्षमता में सुधार करती है और मिट्टी के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाले महत्वपूर्ण कवक समुदायों को अबाधित (Undisturbed) छोड़ ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों का हरित रूपांतरण; भारत की स्वच्छ औद्योगिक संक्रमण की रूपरेखा
- 2 क्या अक्षय ऊर्जा भारत के लिए व्यापक रोजगार का नया आधार बन सकती है?
- 3 भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना घरेलू शासन से वैश्विक सार्वजनिक हित तक
- 4 सुदृढ़ भूजल शासन व्यवस्था: भारत की जल सुरक्षा की आधारशिला
- 5 नागरिक-केंद्रित स्वास्थ्य देखभाल भारत में सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की राह
- 6 भारत की किशोर न्याय व्यवस्था: पुनर्वास, उत्तरदायित्व और सुधार की चुनौती
- 7 बायोमैटेरियल्स निम्न-कार्बन अर्थव्यवस्था के लिए पर्यावरण-अनुकूल विकल्प
- 8 भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता व्यापार, प्रतिभा और आपूर्ति शृंखलाओं हेतु रणनीतिक पुनर्संयोजन
- 9 शहरी अपशिष्ट जल प्रबंधन: संकट और सुधार की आवश्यकता
- 10 रणनीतिक स्वायत्तता एवं UN चार्टर: वेनेजुएला और ग्रीनलैंड संकटों के संदर्भ में वैश्विक व्यवस्था की दिशा
करेंट अफेयर्स के चर्चित मुद्दे
- 1 भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र : विकास की बाधाएं एवं पहल
- 2 भारत में कुपोषण एवं भुखमरी की समस्या : वर्तमान स्थिति, कारण तथा उपाय
- 3 प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण पहल : शासन प्रणाली की दक्षता एवं पारदर्शिता बढ़ाने का महत्वपूर्ण कदम
- 4 इंटरपोल एवं इसकी कार्यप्रणाली : अंतरराष्ट्रीय शांति को बढ़ावा देने में इसकी भूमिका तथा चुनौतियां
- 5 भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी : प्रोत्साहन के प्रयास तथा योजनाओं के कार्यान्वयन में इसके अनुप्रयोग
- 6 राजभाषा समिति की रिपोर्ट तथा हिंदी भाषा

