भारत में समुद्र तटीय प्रदूषण
वायु और जल प्रदूषण के अलावा, भारत अब प्रदूषण की चिंताओं में एक और श्रेणी जोड़ सकता है और वह है समुद्र तटीय प्रदूषण। राष्ट्रीय तटीय अनुसंधान केंद्र (National Centre of Coastal Research - NCCR) के एक अध्ययन के अनुसार पर्यटन और मछली पकड़ने की गतिविधियां भारतीय समुद्र तटों पर अधिकांश प्लास्टिक कचरे में योगदान करते हैं।
रिपोर्ट की मुख्य विशेषताए:
- NCCR ने पूर्वी और पश्चिमी तटों पर छह अलग-अलग समुद्र तटों पर कचरे का गुणात्मक विश्लेषण करने पर पाया कि देश में समुद्र तट प्रदूषण बढ़ रहा है।
- अध्ययन के अनुसार अकेले पर्यटन द्वारा होने वाला प्लास्टिक कचरा सभी समुद्र तट कचरे ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 इकोसाइड: पर्यावरण विनाश का अपराधीकरण
- 2 दिल्ली में ग्राउंड-लेवल ओजोन प्रदूषण का संकट
- 3 भारत में रूफटॉप सोलर ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि
- 4 कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2026
- 5 तिमोर ग्रीन पिजन पर विलुप्त होने का गहरा संकट
- 6 पुणे में भारत का पहला लो एमिशन ज़ोन
- 7 'गंगा सॉफ्ट-शेल कछुआ'
- 8 भारत ने संयुक्त राष्ट्र को सौंपे नए जलवायु लक्ष्य
- 9 एथेनोल 'ब्लेंडेड ईंधन' के नए मानक
- 10 पैंगोलिन की तस्करी रोकने के लिए 'जेनेटिक मैप'
पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी
- 1 भारत तीसरा सर्वाधिक कार्बन उत्सर्जक
- 2 भारत की समुद्री सतह से खनन की योजना
- 3 भारत में आठ में से एक मौत वायु प्रदूषण से
- 4 जैव प्लास्टिक पर्यावरण प्रतिकूल
- 5 वन्यजीव संरक्षण लिए संयुक्त कार्य बल योजना
- 6 भूजल के लिए जल संरक्षण शुल्क
- 7 इको निवास संहिता 2018
- 8 इंडोनेशिया सुनामी
- 9 तटीय नियमन क्षेत्र अधिसूचना, 2018 को मंजूरी

