ट्रांसजेनिक चावल के विकास से आर्सेनिक संचयन में कमी
- चावल की फसल में आर्सेनिक का संचयन भारत में एक गंभीर कृषि समस्या है। इन्हीं समस्याओं का समाधान करने के लिए हाल ही में लखनऊ स्थित सीएसआईआर-नेशनल बॉटनिकल रिसर्च इंस्टीटड्ढूट के वैज्ञानिकों ने फफूंद (Fungal) के अनुवांशिक गुणों का उपयोग करके चावल की ऐसी ट्रांसजेनिक प्रजाति विकसित की है, जिसमें आर्सेनिक संचयन कम होता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस प्रजाति के उपयोग से आर्सेनिक के खतरे से निपटने में मदद मिल सकती है।
ट्रांसजेनिक चावल को कैसे विकसित किया गया?
- सर्वप्रथम शोधकर्ताओं ने मिट्टी में पाए जाने वाले वेस्टरडीकेल ऑरेनटिआका नामक कवक में उपस्थित आर्सेनिक मेथिलट्रांसफेरेज (वार्सएम) जीन ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 स्वदेशी स्वार्म ड्रोन तकनीक और 'थिंकिंग स्वार्म्स'
- 2 क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन
- 3 पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड एवं पीसीपीएनडीटी अधिनियम
- 4 हीलियम-3
- 5 डेंगीऑल वैक्सीन
- 6 'नेत्र' प्रणाली
- 7 तृष्णा मिशन
- 8 परमाणु ऊष्मा-आधारित हाइड्रोजन उत्पादन
- 9 चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर का 'हॉप प्रयोग'
- 10 गैलेक्सीआई द्वारा ओप्टोसार उपग्रह लॉन्च
- 1 हाइपर स्पेक्ट्रल इमेजिंग सैटेलाइट
- 2 जीसैट-29
- 3 ग्रोथ-इंडिया टेलीस्कोप
- 4 अर्थ बायो जीनोम प्रोजेक्ट
- 5 स्पाइनेकर: मानव मस्तिष्क के समान सुपरकंप्यूटर
- 6 ऑब्सेसिव कम्पलसिव डिसऑर्डर
- 7 ह्यूमन माइक्रोबायोम प्रोजेक्ट
- 8 एलिसा एवं ईसीएस: टीबी परीक्षण की नवीन विधि
- 9 निमोनिया और डायरिया प्रोग्रेस रिपोर्ट 2018
- 10 सेल्यूलोज नैनो फाइबर: फसलों में रसायनों के छिड़काव की नवीन विधि
- 11 शक्ति: भारत का पहला स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर
- 12 किलोग्राम की मानक परिभाषा में संशोधन
- 13 भारत में माइक्रोबायोम

