एससीओ - भारत-मध्य एशिया संबंधों का आधार
|
विश्व के सर्वाधिक ऊर्जा खपत वाले देशों में से एक भारत, एससीओ की सदस्यता के माध्यम से मध्य एशियाई क्षेत्र की गैस तथा तेल परियोजनाओं तक पहुंच बना सकता है। |
भारतीय विदेश मंत्री ने 21-22 मई, 2019 को बिश्केक (किर्गिज गणराज्य) में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया।
- बैठक में बिश्केक में 13-14 जून, 2019 को आयोजित होने वाले आगामी शिखर सम्मेलन की तैयारियों की समीक्षा की गई तथा अंतरराष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय महत्व के मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान भी किया गया।
शंघाई सहयोग संगठन
यह एक स्थायी अंतर ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 अमेरिका–ईरान इस्लामाबाद समझौता: पश्चिम एशिया में नई कूटनीतिक शुरुआत
- 2 अल नीनो : भारत के लिए एक गंभीर विकासात्मक चुनौती क्यों?
- 3 भारत का अप्रत्याशित 'बेबी बस्ट': विश्व के लिए एक जनसांख्यिकीय चेतावनी
- 4 भारत में रोजगार योग्यता संकट: डिग्री और कौशल के बीच बढ़ती खाई
- 5 16वाँ वित्त आयोग: कर-वितरण, उपकर और संघीय संतुलन का प्रश्न
- 6 भारत में ध्वनि प्रदूषण : पर्यावरणीय न्याय की नई चुनौती
- 7 एक्स्ट्रागैलेक्टिक जेट्स: ब्रह्मांड की सबसे शक्तिशाली लेज़र बीम
- 8 भारत–यूएई संबंध : ऊर्जा सुरक्षा से व्यापक रणनीतिक साझेदारी तक
- 9 भारत में जैव-ऊर्जा की संभावनाएं हरित ऊर्जा संक्रमण का आधार - आलोक सिंह
- 10 पश्चिम एशियाई संकट : भू-राजनीतिक द्वंद्व, ऊर्जा सुरक्षा और भारत के रणनीतिक सरोकार - आलोक सिंह

