तमिलनाडु में लौह युग के साक्ष्य
हाल ही में तमिलनाडु में किये गये उत्खनन के निष्कर्षों की कार्बन डेटिंग से इस बात के प्रमाण मिले हैं कि भारत में 4,200 वर्ष पूर्व से ही लोहे का इस्तेमाल किया जा रहा था। इस खोज से यह स्थापित हो गया है कि 4,200 साल पूर्व निवास करने वाले तमिल लोग लोहे के बारे में जानते थे।
- यह खुदाई तमिलनाडु में कृष्णागिरी के पास मयिलादुम्पराई (Mayiladumparai) में हुई है।
- यह स्थल कई पुरातात्विक स्थलों जैसे तोगरापल्ली, गंगावरम, संदूर, वेदारथट्टक्कल, गुट्टूर, गिदलुर, सप्पमुत्लु और कप्पलावाड़ी के मध्य में स्थित है।
- मयिलादुम्पराई, माइक्रोलिथिक (Microlithic) (30,000 ईसा पूर्व) और प्रारंभिक ऐतिहासिक (600 ईसा पूर्व) ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 चोल कालीन अनैमंगलम ताम्रपत्र
- 2 पानज़थ नाग चश्मा संरक्षण उत्सव
- 3 भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर मंदिर घोषित
- 4 ओडिशा ने बोमकाई बुनाई पुनरुद्धार अभियान शुरू
- 5 हजारीबाग से 3,200 साल पुरानी बस्ती के साक्ष्य प्राप्त
- 6 सांस्कृतिक कूटनीति: उपहारों के जरिए विश्व पटल पर 'ब्रांड इंडिया
- 7 वतन को जानो कार्यक्रम
- 8 बैसाखी पर्व
- 9 आदि शंकराचार्य
- 10 VM फ्रेम्स राष्ट्रीय फिल्म निर्माण प्रतियोगिता

