विचाराधीन कैदियों और अपराधियों के वोटिंग अधिकार
16 अप्रैल, 2019 को सर्वाेच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई वाली एक पीठ ने एक ऐसी याचिका पर सुनवाई की जो विचाराधीन कैदियों और अपराधियों के वोट देने के उनके अधिकार को नकारती है।
कौन वोट दे सकता है और कौन नहीं?
- जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 62(5) के तहत, पुलिस की वैध हिरासत में व्यत्तिफ़ और दोष सिद्ध होने के बाद कारावास की सजा काट रहे व्यत्तिफ़ वोट नहीं डाल सकते। विचाराधीन कैदियों को भी चुनाव में भाग लेने से बाहर रऽा जाता है, भले ही उनका नाम मतदाता सूची में हो।
- केवल वही व्यत्तिफ़ जिनको निवारक ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 सर्वोच्च न्यायालय ने शिक्षा के अधिकार कानून को और सशक्त किया
- 2 राष्ट्रमंडल देशों के लोक सभा अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन
- 3 जलज आजीविका केंद्र
- 4 विस्फोटक उपकरण डेटा प्रबंधन प्रणाली का उद्घाटन
- 5 भारतीय थल सेना और IISc के बीच समझौता (MoU)
- 6 लंबाडी समुदाय
- 7 UIDAI ने जारी किया आधार शुभंकर: उदय
- 8 86वां अखिल भारतीय अधिष्ठान अधिकारियों का सम्मेलन
- 9 राष्ट्रीय बांध सुरक्षा समिति (NCDS)
- 10 भारत के लोकपाल का स्थापना दिवस

