खनन के बाद भूमि को पुनः हरा-भरा किया जाए
- सुप्रीम कोर्ट द्वारा 8 जनवरी, 2020 को केन्द्र सरकार को यह निर्देश दिया गया कि वह पर्यावरण मंजूरी देते समय तथा खनन पट्टा व खनन योजना बनाते समय यह अनिवार्य शर्त रखे कि खनन कार्य पूरा होने के बाद जमीन को पूर्व स्थिति में हरा भरा बनाया जाएगा।
- यह आदेश सीजेआई एसए बोबडे, जस्टिस सूर्यकांत और बीआर गवई की पीठ द्वारा दिया गया। न्यायालय के अनुसार किसी क्षेत्र में खनन कार्यों के संचालन की वजह से घास पूरी तरह से खत्म हो जाती है।
- सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि खनन पट्टाधारकों को खनन क्षेत्रें को फिर से ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 पंचायती राज संस्थाओं के सशक्तिकरण हेतु तीन नई पहलें
- 2 ‘सप्त धारा’ ढांचा: विकसित भारत 2047 का रोडमैप
- 3 सुजलम भारत डेटा नीति: ग्रामीण पेयजल शासन का सुदृढ़ीकरण
- 4 NSG ने शुरू किया भारत का पहला सर्व-महिला कमांडो कोर्स
- 5 प्लेटफॉर्म इकोनॉमी में महिलाओं का डिजिटल वित्तीय समावेशन
- 6 आदि वाणी: जनजातीय भाषा संरक्षण हेतु AI-आधारित प्लेटफॉर्म
- 7 केंद्र सरकार ने भारतीय मानक समय (IST) को अनिवार्य बनाने वाले नियमों को अधिसूचित किया
- 8 भारत का पहला मृदा बनावट (Soil Texture) मानचित्र
- 9 लद्दाख के नुब्रा में श्योक नदी पर 'उदमारू पुल' का उद्घाटन
- 10 भारत का पहला एआई-संचालित पक्षी अभयारण्य: भांडुप बर्ड पार्क

