एग्री-टेक स्टार्टअप : संभावना, चुनौतियां एवं बढ़ावा देने के प्रयास
अमेरिका और चीन के बाद भारत तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम हब बन गया है। इन स्टार्टअप में एक बड़ी संख्या एग्री-टेक स्टार्टअप की है जो कृषि मूल्य श्रृंखला द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियों के लिए प्रासंगिक और अभिनव समाधान प्रदान कर रहे हैं।
- 2019-20 के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, देश में कुल मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में से 3.8 प्रतिशत एग्री-स्टार्टअप हैं। इनमें से 54 प्रतिशत एग्री-टेक स्टार्टअप के रूप में वर्गीकृत हैं जबकि शेष डेयरी फार्मिंग, खाद्य प्रसंस्करण और अन्य के क्षेत्र से संबंधित हैं। ये रोजगार के नए अवसर पैदा कर रहे हैं और भारतीय जनसांख्यिकी के सामाजिक-आर्थिक ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 धारणीय कृषि: रोजगार, स्वास्थ्य एवं पर्यावरणीय संतुलन की आधारशिला
- 2 राष्ट्रीय खेल नीति 2025
- 3 भारत की जैव अर्थव्यवस्था: सतत और समानतामूलक विकास की प्रेरक शक्ति
- 4 भारत में शहरी लचीलापन: सतत अस्तित्व की रूपरेखा
- 5 आतंकवादी वित्तपोषण के जोखिम: सीमाओं से परे एक अदृश्य ख़तरा
- 6 क्या भारत के शहर साइबर चुनौतियों का सामना करने को तैयार हैं?
- 7 परंपरागत चिकित्सा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता: प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का सेतु
- 8 भविष्य के लिए कौशल: भारत के कार्यबल परिदृश्य का रूपांतरण
- 9 NISAR मिशन: भारत–अमेरिका की अंतरिक्ष साझेदारी का नया अध्याय
- 10 भारत की वर्तमान व्यापार वार्ताएं