कैदियों की रिहाई के लिए सुप्रीम कोर्ट की फास्टर प्रणाली
जमानत आदेश पारित होने के बावजूद इस तरह के आदेशों के संचार में देरी के कारण रिहा नहीं होने वाले जेल-कैदियों की दुर्दशा के बारे में चिंता व्यक्त करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 23 सितंबर, 2021 को आदेशों की ई-प्रमाणित प्रतियों के प्रसारण के लिए 'फास्टर' (FASTER- Fast and Secured Transmission of Electronic Records) नामक इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली के उपयोग को मंजूरी दे दी।
पृष्ठभूमि
- मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने 16 जुलाई, 2021 को पिछली सुनवाई में इस मुद्दे पर स्वत: संज्ञान लेते हुए कहा था कि जेलों में जमानत के आदेशों को इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रसारित करने ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 CISF, 250 से अधिक सीपोर्ट्स का सुरक्षा नियामक
- 2 ‘हमारा शौचालय, हमारा भविष्य’ अभियान
- 3 'युवा एआई फॉर ऑल' का शुभारंभ
- 4 अंगदान व आवंटन पर राष्ट्रीय एकरूप नीति का निर्देश
- 5 बिलों पर अनुमोदन समय-सीमा: सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
- 6 16वें वित्त आयोग ने राष्ट्रपति को अपनी रिपोर्ट सौंपी
- 7 कॉर्पोरेट इन-हाउस काउंसिल को BSA की धारा 132 का संरक्षण नहीं
- 8 राष्ट्रीय उद्यानों व अभयारण्यों के आस-पास खनन गतिविधियों पर प्रतिबंध
- 9 भारतीय जेलों में विचाराधीन कैदियों की बहुलता
- 10 लैंगिक समानता एवं महिला सशक्तीकरण हेतु राष्ट्रीय अभियान

