सुभेद्य वर्गों की औपचारिक वित्त तक पहुंच : आर्थिक सशक्तीकरण हेतु वित्तीय समावेशन आवश्यक
वित्तीय समावेशन से जहां एक ओर समाज के सुभेद्य वर्ग बैंकिंग, बीमा एवं पेंशन जैसी सेवाओं के माध्यम से अपनी भविष्य की आवश्यकताओं हेतु बचत करने को प्रेरित होते हैं; तो वहीं दूसरी तरफ, इससे देश में पूंजी निर्माण की दर में वृद्धि होती है। वित्तीय समावेशन के व्यापक परिणामों में रोजगार सृजन, तीव्र आर्थिक विकास तथा वित्तीय सेवाओं का गुणवत्तापूर्ण वितरण शामिल है। समाज के वंचित एवं सुभेद्य वर्गों तक वित्तीय सेवाओं की उपलब्धता को आसान बनाने के लिए बैंक शाखाओं की संख्या में वृद्धि की जानी चाहिए। साथ ही, सूक्ष्म वित्तीय संस्थाओं, स्वयं सहायता समूहों तथा डिजिटल बैंकिंग ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 'क्लाइमेट टिपिंग पॉइंट्स' पर बढ़ता विवाद
- 2 चिकित्सा आपात स्थितियों में 'प्रोटीन जैव-सेंसर' की भूमिका
- 3 फास्ट ट्रैक कोर्ट: क्या परीक्षा पेपर लीक जैसे अपराधों पर लगेगी प्रभावी रोक?
- 4 Gen Z आंदोलन: विरोध-प्रदर्शन का अधिकार और संवैधानिक सीमाएँ
- 5 अमेरिका–ईरान इस्लामाबाद समझौता: पश्चिम एशिया में नई कूटनीतिक शुरुआत
- 6 अल नीनो : भारत के लिए एक गंभीर विकासात्मक चुनौती क्यों?
- 7 भारत का अप्रत्याशित 'बेबी बस्ट': विश्व के लिए एक जनसांख्यिकीय चेतावनी
- 8 भारत में रोजगार योग्यता संकट: डिग्री और कौशल के बीच बढ़ती खाई
- 9 16वाँ वित्त आयोग: कर-वितरण, उपकर और संघीय संतुलन का प्रश्न
- 10 भारत में ध्वनि प्रदूषण : पर्यावरणीय न्याय की नई चुनौती
- 1 वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य - विद्यमान चुनौतियां तथा व्यापक संभावनाओं के क्षेत्र
- 2 भारत में बाढ़ आपदा प्रबंधन : एकीकृत, बहु-आयामी एवं समावेशी रणनीति की आवश्यकता
- 3 तटीय पारिस्थितिक तंत्र का संरक्षण : अनिवार्यताएं एवं निहितार्थ
- 4 हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी : भारत के हित, जुड़ाव एवं निहितार्थ
- 5 भारत में मानसिक स्वास्थ्य : वर्तमान परिप्रेक्ष्य में एक प्रमुख स्वास्थ्य चुनौती

