आरक्षित निर्णयों पर सुप्रीम कोर्ट के नए दिशा-निर्देश

सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में सभी उच्च न्यायालयों के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा कि आरक्षित निर्णय (Reserved Judgment) तीन माह के भीतर सुनाए जाएँ तथा जमानत (Bail) संबंधी आदेश उसी दिन या अगले कार्यदिवस तक अपलोड किए जाएँ। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि निर्णय में अनावश्यक विलंब संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन हो सकता है।

आरक्षित निर्णय क्या है?

जब न्यायालय किसी मामले की सुनवाई पूरी कर लेता है, लेकिन तत्काल फैसला सुनाने के बजाय बाद में निर्णय देने के लिए सुरक्षित रखता है, तो उसे ....

क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |

पूर्व सदस्य? लॉग इन करें


वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |

संबंधित सामग्री