सुप्रीम कोर्ट ने गृहिणियों के श्रम को दी पहचान
हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक निर्णय में कहा कि गृहिणियों द्वारा किया जाने वाला अवैतनिक घरेलू कार्य स्वतंत्र आर्थिक मूल्य रखता है। न्यायालय ने “घरेलू देखभाल की हानि (Loss of Domestic Care)” नामक नई श्रेणी बनाते हुए गृहिणियों की न्यूनतम काल्पनिक मासिक आय ₹30,000 निर्धारित की है, जिसे प्रत्येक तीन वर्ष में 10% बढ़ाने का निर्देश दिया गया।
निर्णय की प्रमुख बातें
- गृहिणियों के घरेलू कार्य को आर्थिक योगदान के रूप में मान्यता।
- यदि गृहिणी नौकरी भी करती थी, तो उसके वेतन के अतिरिक्त घरेलू कार्य के लिए अलग मुआवजा मिलेगा।
- खाना बनाना, बच्चों व बुजुर्गों की ....
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