अनुच्छेद 21 और प्रजनन स्वायत्तता
हाल ही में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने गंभीर बौद्धिक एवं विकासात्मक दिव्यांगता से ग्रस्त 23 वर्षीय महिला के लिए टोटल एब्डॉमिनल हिस्टेरेक्टॉमी (गर्भाशय निष्कासन) की अनुमति दी। न्यायालय ने चिकित्सकीय विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के आधार पर माना कि महिला सूचित सहमति (Informed Consent) देने में सक्षम नहीं है और यह प्रक्रिया उसके सर्वोत्तम हित में है।
सूचित सहमति और ‘Parens Patriae’ सिद्धांत
चिकित्सा नैतिकता के अनुसार किसी भी प्रमुख उपचार के लिए रोगी की स्वतंत्र एवं सूचित सहमति आवश्यक है। किंतु जब व्यक्ति बौद्धिक अक्षमता के कारण निर्णय लेने में असमर्थ हो, तब न्यायालय ‘Parens Patriae’ सिद्धांत के ....
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